Tuesday, April 27, 2021

Holi ke din bhabhi ki chudai ka moka - Hindi sex story

Bhabhi ki chudai

 ये कहानी इस साल की होली की है. मेरे घर के बगल में एक मस्त भाभी रहती है जिनका हस्बैंड बिज़नेस करता है और वो बिज़नेस के सिलसिले में ज़्यादा टाइम बाहर रहते है.भाभी का नाम लक्समी (काल्पनिक) है और उनके फिगर का साइज ३४″ ३०″ ३४″ है. भाबी एक-दम कंटाप माल लगती है. भाभी की नयी-नयी शादी हुई है. उनकी आगे लगभग २५ होगी और अंकल की आगे ४५ है.अंकल की पहली पत्नी मर्डर गयी थी इसलिए अंकल ने फिरसे शादी की. क्युकी वो बगल में ही रहते थे इसलिए मेरी मम्मी से पहले ही बात शुरू हो गयी थी 

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फिर धीरे-धीरे हम लोग एक-दुसरे के यहाँ आने-जाने लगे.पैसे की कमी से भाभी ने अपने से डबल आगे वाली से शादी की थी. भाभी गाँव की थी पर जो भी कहो वो थी एक-दम ज़बरदस्त माल है. जो भी उनको देखे उसका २० सेकंड में लोढ़ा तनक जाये और मेरी आगे २० है इसलिए जवानी तुरंत चढ़ जाती है.मई उनके यहाँ एक दिन गया था तब वो एक पिंक कलर का बाथिंग गाउन में दरवज़ा खोलने आयी. 

Bhabhi ki chudai :- उनका बूब्स क्लियर दिख रहे थे मुझे और लक्समी भाभी की मटकती हुई बड़ी सी गांड मुझे अपनी और अत्त्रक्ट कर रही थी.अंकल जॉब पे गए हुए थे. मई अपने आप को रोक नहीं पाया और मैंने भाभी को पीछे से जाके पकड़ लिया और बोलै-

मैं: भाभी मैं आपका दीवाना हु.फिर मैंने भाभी का फेस अपनी तरफ घुमाया और उन्हें किश करने लगा लिप्स पे मम्ममूआ. भाभी ने मुझे कुछ नहीं कहा और ऐसे बेहवे कर रही थी जैसे कुछ हो ही ना रहा हो. 

अब किश करते हुए १० मिनट हो गए थे. तभी अचानक से दूर नॉक हुआ.भाभी: लगता है तुम्हारे भैया आ गए है.मई: सहित!मई आगे कुछ नहीं कर पाया. मैंने उसी वक़्त ही सोच लिया था की इस होली पे भाभी की चुदाई करके इनकी छूट फाड़ के भोंसड़ा बना दूंगा.होली के दिन सुबह करीब ११ बजे मई उनके घर पहुंचा. भाभी रेड साड़ी में थी और एक-दम माल लग रही थी. काले ब्लाउज के ऊपर से उनके उभारदते चूचे साफ़ दिख रहे थे. 

मेरी नज़र उनके चूचो से हट ही नहीं रही थी. कितनी भी कोशिश कर लू मई नज़र उनके चूचो से हटा ही नहीं पा रहा था.भाभी: क्या देख रहे हो राहुल?मई: सोच रहा हु की रंग कहा लागू आपको?भाभी एक-दम ओपन माइंडेड थी. फिर वो मुझे अंदर ले गयी और गेट लॉक कर दिया.अब मई दिंनिंग हॉल में था. भाभी ने खाने में पकोड़े और पूरी दी.

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भाभी: जूस लोगे?

मैं जो भी आप पीला दो मई थोड़ी न मन करूँगा. आप अपनी ही भाभी हो.

मैं फिरसे बोलै: भाभी पहले होली खेल लो बाद में खाऊंगा.भाभी: पहले आराम से खा लो.

मैं: आप अपने हाथो से खिला दो.

भाभी: खुद खा लो मई जा रही हु किचन में कुछ काम है मुझे.मई: फिर मैंने २-३ पीेछे खा लिए.भाभी किचन में थी. मैंने अपने हाथ में लाल रंग लगा कर भाभी को पीछे से पकड़ा और उनके मुँह पे रंग लगा दिया. 

मई भाभी के पीछे सत्ता हुआ था और मेरा लुंड खड़ा हो गया और ऊपर से मई अपना हाथ आगे से भाभी की जांघो में ले गया और भाभी के छूट को हाथ से सहलाने लग गया.

भाभी: ये क्या पूरी ड्रेस खराब कर दी तुमने.मई: भाभी अभी तो चेहरे पे ही लगाया है और अभी तो ये शुरुआत है.भाभी: ये लाल रंग आराम से छूट में जायेगा.

मैं: भाभी बच्चे कहा है आपके?भाभी: बाहर गए है रंग खेलने.फिर मैंने हरा रंग निकाल के भाभी के फेस पे लगाया और उनके हाथ पे भी लगाया. भाभी भी अंदर से अपना रंग लेके आयी और मुझे लगाया. मैंने अब भाभी के चेहरे के साथ पूरे हाथो पे और कमर पे भी रंग लगाया और धीरे-धीरे उनके चूचे को भी मसल के रंग लगाया.

भाभी: ये क्या कर रहे हो राहुल?मई: रंग लगा रहा हु भाभी. आपने ही कहा था की आराम से छूट जायेगा फेस का रंग.भाभी: तुम्हारी गर्लफ्रेंड नहीं है क्या?मई: आप बन जाओ न भाभी मुझे बस आप ही चाहिए हो.भाभी: अगर तुम पहले मिले होते तो तुमसे ही शादी कर लेती.

मैं: अभी भी देर कहा हुई है भाभी.भाभी: चुप नालायक.अब भाभी कुछ नहीं बोल रही थी. फिर मैंने धीरे से भाभी की साड़ी में हाथ दाल कर छूट में रंग लगाया और पीछे भाभी के नैक पे किश करके चूमने लगा और उनके हाथ को भी चूमा.अब शायद भाभी गरम हो रही थी. 

मैं भाभी को गॉड में उठा कर बैडरूम में ले गया और भाभी को लिपलॉक करके डीप किश करने लगा. भाभी भी मेरा साथ देने लगी. शायद उनकी भी आग बहुत दिन से बुझी नहीं थी.हम दोनों आहें भरने लग गए थे और आठ.. अहह.. की आवाज़े आ रही थी. 

अब मैं फ्रिज से चॉकलेट लेके आया और भाभी के होंठ पे लगा के चूमने लगा. 

भाभी भी शामे ऐसा ही करने लगी और अब मई उनकी नैक पे चॉकलेट दाल के चूसने लगा.भाबी: आठ.. जान ाःह.. लव यू मेरी जान.भाभी भी पूरा मज़ा ले रही थी हर चीज़ का. अब मैंने भाभी का ब्लाउज उतार दिया और पूरे चूचे को पागलो की तरह चूसना शुरू कर दिया और धीरे-धीरे काटना शुरू कर दिया.

भाभी: ाःह… उम्.. हहह… आअह्ह्हा..अब मई उनके एक बूब पे चॉकलेट लगा कर चूसने लगा और दुसरे हाथ से उनका दूसरा बूब दबाया. भाभी सिसकिया ले रही थी और अब मैंने उनकी साड़ी खोल के उन्हें नंगा कर दिया था.फिर मई उनकी छूट के पास गया. 

उनकी छूट पे हलके बाल थे और मुझे हलके बाल पसंद है और मैंने जीभ बाहर निकाल के उनकी छूट को चाटना शुरू कर दिया.भाभी: आठ.. मेरी जान छोड़ डालो अब इस छूट को. और ज़ोर से चाटो आठ.. और ज़ोर से  मज़ा आ रहा है और ज़ोर से.करीब १० मिनट के बाद मई अब २ ऊँगली उनकी छूट में दाल कर अंदर-बाहर करने लगा और तेज़ी से chut chodni शुरू कर दी. 

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करीब १५ मिनट बाद मैंने अपना लुंड लक्समी भाभी के हाथ में दिया तो वो लुंड देख के शॉक हो गयी.भाभी: बाप रे इतना बड़ा लुंड. ये तो काम से काम ९ इंच लम्बा और ३ इंच मोटा होगा.मई: हां क्यों भैया का इतना बड़ा नहीं है?भाभी: भैया के लुंड का साइज सिर्फ ५ इंच है. 

उससे तो मई ढंग से सटिस्फी भी नहीं होती हु. मेरा शुरू से बड़ा लुंड लेने का सपना था. लगता है आज पूरा हो जायेगा जान.फिर मैंने उनके मुँह में लुंड दाल के उन्हें चूसने को बोलै.भाभी: पूरा नहीं ले पाउंगी मुँह भर गया है मेरा.फिर भाभी लुंड लेके चूसने लगी एक-दम रंडी की तरह और गूप.. गूप.. की आवाज़े आने लग गयी.

मैं: ले ना कुटिया इससे ाचा मौका दोबारा नहीं मिलेगा.और ये बोल कर मैंने लक्समी भाभी के मुँह को छोड़ना स्टार्ट किया. उनके पूरे गले के अंदर तक लुंड चला गया था. 

करीब १० मिनट बाद लुंड का स्पर्म उनके मुँह में दाल दिया और वो सारा माल रंडी की तरह पी गयी.अब मई और भाभी ६९ पोजीशन में हो गए और मैंने अपना लुंड उनके मुँह में दाल दिया और भाभी की छूट को चूसना चालु किया.

भाभी: आए.. आह.. कॉमन येह.. येह..

मैं: जान मज़ा आ रहा है तेरी छूट चाटने में.मेरे मुँह पे रंग भी लग गया था. २० मिनट तक हमने एक-दुसरे के ६९ में मज़े लिए. अब मैंने अपना ९ इंच का गरम लोहा उनकी छूट के बाहर गोल-गोल घुमाया और भाभी सिसकारियां ले रही थी.

भाभी: मैं तुम्हारी ही रंडी हु छोड़ दो मुझे. छोड़-छोड़ के मुझे तुम अपनी रखैल बना लो जान.मैंने अपना कंधे पे उसकी टाँगे खोल के राखी और अपने लुंड को रंडी की छूट पे टिकाया. मैंने लुंड के टोपे का पहला झटका दिया और भाभी के मुँह से चीख निकल गयी.

भाभी: बाहर निकाल मादरचोद दर्द हो रहा है. आअह्ह्ह.. एआइइइइ.. मर्डर गयी..लुंड अंदर नहीं जा रहा था तो मई बगल में किचन से सरसो का तेल लेके आया और उनकी छूट के बाहर लगाया और अपने लुंड पे तेल डाला और फिर एक और ज़ोर का झटका उनकी छूट में मारा.

भाभी: आअह्हह्हआ.. मर् गयी मैं. है… मादरचोद बाहर निकाल दर्द हो रहा है.

मैं: चुप कर रंडी. मैंने पहले ही दिन तुझे देख कर छोड़ने का प्लान बना लिया था. अब तू बस कुटिया की तरह चुदती जा रांड.भाभी: आठ.. जान तू जो कहेगा मई करुँगी.मैंने उसको छोड़ने के रफ़्तार बढ़ा दी और मादरचोद वाली को छोड़ रहा था.

लक्समी: आज से मई तेरी रखैल हु. जब भी तुम्हारा मैं करेगा आ जाना कॉल करके आअह्ह्ह.. नाउ फ़क में बेबी आह्हः… फ़क में हर्डर! बहुत मज़ा आ रहा है.उसकी पूरी चीखो की आवाज़ रूम में गूँज रही थी. 

मैंने बोलै-मैं: लक्समी डार्लिंग आज तुमने मुझे जन्नत की सैर करवा दी मज़ा आ गया बहनचोद.अब मई नीचे हो गया और भाभी काउगर्ल की पोजीशन में आके लुंड पे पागलो की तरह छोड़ने लगी. आज जाके मेरा सपना पूरा हुआ है. मैं भर के ठुकाई करि मैंने.अब मेरा स्पर्म निकलने वाला था तो मैंने सारा माल फिर लक्समी के मुँह में भर दिया. 

उसका मुँह इतना भर गया था की कुछ माल नीचे भी गिर गया.मई: रुक ना रंडी अभी तेरी गांड मारनी बाकी है.लक्समी: नो नहीं गांड नहीं दूँगी.

मैं: चुप साली चल कुटिया बन जा जल्दी से.फिर भाभी ने कुटिया की तरह पोजीशन ले ली. मैंने फिरसे अपना लुंड लक्समी की गांड पे टिका कर धक्का मारा.

भाभी: आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह…मई स्पीड बढ़ा कर अपनी भाभी को छोड़ने लगा. थप थप की आवाज़े आणि शुरू हो गयी.भाभी: आअह्ह्ह.. जान मज़ा आ गया.अब मेरा पानी निकलने वाला था. मैंने इस बार माल उनकी गांड में ही पेल दिया. होली के दिन मई शाम तक भाभी के यहाँ पर ही रुका और हम लोगो ने ३ बार और चुदाई करि.होली के बाद lockdown हो गया. 

इस वजह से मई भाभी को दोबारा नहीं छोड़ पाया. उम्मीद करता हु ये लोखड़ौन जल्दी ख़तम हो जाये और फिरसे मई अपनी भाभी को छोड़ पाव. अभी ऑनलाइन सिर्फ वीडियो चाट होती है हम दोनों के बीच और सेक्स चाट बस.

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