Tuesday, July 28, 2020

Rupa bhabhi ki chudai ki hindi sex story

desi porn kahani हैल्लो दोस्तों, में राजीव और मुझे उम्मीद है कि मेरी आज की कहानी सभी पढ़ने वालो को बेहद पसंद आएगी। अब सबसे पहले में अपना परिचय दे दूँ, मेरा नाम अनीश है और में कोलकाता का रहने वाला हूँ। दोस्तों मुझे छोटी उम्र से ही सेक्स करने की बहुत इच्छा थी और इसलिए में हमेशा एक औरत जिसका नाम सुधा था, में उस औरत के साथ सेक्स करना चाहता था, क्योंकि वो बहुत अनुभवी और सुंदर अच्छी लगती। दोस्तों यह बात उस समय की है जब में पढ़ाई कर रहा था और में इंग्लीश की ट्यूशन के लिए मेरे एक सर के घर जाता था और हम लोग पांच दोस्त थे, जो वहां पर एक साथ जाते थे। वो सर हम सभी को दोपहर तीन बजे बुलाते थे और वो हमे पांच बजे तक पढ़ाकर फ्री करते थी और हम सभी दोस्त हर दिन पढ़ने जाते थे। दोस्तों हमारे वो सर शादीशुदा थे और उनकी पत्नी एकदम मस्त माल थी और वो बहुत ही सुंदर थी। फिर जिस दिन पहली बार मैंने उसको देखा में बस उसी के बारे में दिन रात सोचा करता था। उसका नाम रूपा था और वो एक बिंगाली परिवार से थे। दोस्तों में आप सभी को बता दूँ कि रूपा हर दिन दोपहर के समय अपने बेडरूम में सोती थी और सर हम सभी को हॉल में पढ़ाते थे।

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फिर रूपा के उठने का समय 4.30 का था और वो गाउन पहनकर सबसे पहले बाथरूम में जाती हॉल में बस एक ही बाथरूम था और हम लोग जहाँ पढ़ते थे। वो जगह बाथरूम के बिल्कुल पास ही थी। फिर जब भी वो बाथरूम के अंदर मूतने बैठती और फिर मूतने लगती, तब उसका पेशाब इतने दबाव के साथ निकलता था कि उसकी आवाज़ हमारे कानों तक आ जाती। दोस्तों मेरे मन में बस यही इच्छा होती थी कि मुझे बस एक बार उसके साथ सेक्स करने का मौका मिल जाए उसके बाद मेरी ज़िंदगी मस्त हो जाएगी, मुझे बड़ा मज़ा आएगा में हमेशा उसकी चुदाई के विचार में डूबा रहा करता था। फिर ऐसे ही दिन गुज़रते चले गये और कुछ दिन बाद हमारे सर जो एक स्कूल में टीचर थे उनका तबादला हो गया। तभी सर ने हम सभी को बताया कि उनका अब तबादला हो गया है और इसलिए हम किसी और टीचर का बंदोबस्त कर ले। फिर सर ने हमे एक बात बताई कि उनकी पत्नी भी वही विषय पढ़ाती है अगर हम चाहे तो उनसे ट्यूशन ले सकते है, क्योंकि सर का तबादला कुछ दिनों के लिए हुआ था और उन्हे अभी अपने घरवालों को अपने साथ ले जाने की अनुमति और रहने के लिए कोई फ्लेट भी नहीं मिला था, इस वजह से सर वहां पर अकेले ही जा रहे थे।

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अब मेरे सभी दोस्तों ने साफ मना कर दिया और वो दूसरे टीचर के पास जाने लगे थे, लेकिन में रूपा मेडम से ट्यूशन लेने को तैयार हो गया। फिर जब सर जाने लगे तब वो मुझसे कहने लगी कि में अपनी टीचर का ध्यान भी रखूं और अगर उन्हे कोई भी चीज़ चाहिए तो उन्हे में ला दूँ। फिर मैंने सर को अपनी तरफ से पूरा पूरा भरोसा दिलाया कि में हाँ ठीक है में ऐसा ही करूँगा और सर चले गये। अब मेरी मेडम घर में एकदम अकेली रहने लगी थी, उनका अब तक कोई भी बच्चा भी नहीं था और फिर मैंने मेडम से ट्यूशन लेना शुरू कर दिया और में कुछ ही दिन में मेडम का बहुत अच्छा दोस्त भी बन गया और मेडम भी मेरी दोस्त बन गई। अब में मेडम का बहुत ध्यान रखने लगा था और मेडम मुझे एक छात्र की तरह प्यार भी बहुत करती थी। फिर धीरे धीरे एक महिना बीत गया। एक दिन मैंने मेडम से पूछा कि मेडम क्या आपको सर की याद नहीं आती? तब मेडम ने मुझसे कहा कि हाँ याद तो मुझे उनकी बहुत आती है, लेकिन मेरे पास कोई और रास्ता भी तो नहीं है। अब मैंने मेडम से हिम्मत करके कहा कि मेडम क्या में आपसे एक बात पूछ सकता हूँ? मेडम ने कहा कि हाँ तुम मुझसे कुछ भी बोलो, उसके पहले में तुम्हे एक बात बोलना चाहती हूँ।

फिर मेडम ने मुझसे कहा कि जब हम दोनों एक दूसरे का इतना ध्यान रखते है और एक बहुत अच्छे दोस्त भी है तो फिर आज से तुम मुझे मेडम नहीं बल्कि रूपा के नाम से बुलाना और वैसे भी तुम पूरे दिन मेरे घर में ही तो रहते हो, इसलिए मुझे तुम्हारे मुहं से मेडम सुनना बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता। अब में तैयार हो गया और फिर रूपा ने मुझसे कहा कि क्यों तुम मुझसे अभी कुछ पूछ रहे थे? तब मैंने बहुत हिम्मत करके उनसे कहा कि रूपा फिर में चुप हो गया और में अपनी आधी बात में ही रुक गया। अब रूपा मुझसे पूछने लगी हाँ बोलो ना वो क्या बात है? और मैंने कुछ नहीं कहा। फिर उसने मुझे अपनी कसम दे दी और वो बोली कि कहो ना नहीं तो तुम मुझसे कभी भी बात मत करना और मुझसे दोबारा पढ़ने भी मत आना। फिर उस बात को सुनकर मैंने उसको पूछा कि तुम बुरा तो नहीं मनोगी? उसने कहा कि नहीं मुझे कुछ भी बुरा नहीं लगने वाला। अब में कहने लगा कि तुम्हे क्या सेक्स करने का मन नहीं करता? मेरे यह शब्द सुनकर रूपा एकदम चुप हो गयी और वो मेरी तरफ एकदम आश्चर्य से देखने लगी। में उस वजह से एकदम डर गया था और मैंने उसको माफी मांगी।

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अब उसने मुझसे कहा कि तुम्हे माफ़ नहीं बल्कि मुझे तुम्हे धन्यवाद कहना चाहिए तुम्हे मेरा कितना ख्याल है और मेरे पति को मेरा ज़रा सा भी ध्यान नहीं है और उसने तभी मुझे मेरे गाल पर एक चुम्मा दे दिया, जिसकी वजह से में एकदम चकित रह गया। फिर उसके बाद हम दोनों ने साथ में खाना खाया और उसके बाद में अपने घर चला गया। फिर कुछ दिनों के बाद में एक दिन रूपा के घर गया, लेकिन वो उस समय मुझे घर में कहीं भी दिखाई नहीं दे रही थी, में हर एक कमरे को देख रहा था, लेकिन वो कहीं भी नहीं थी। अब उसके बाद मैंने बाथरूम का दरवाजा खोला और फिर दोस्तों मैंने उस दिन वो द्रश्य देखा जो मैंने कभी सपने में सोचा भी नहीं था। दोस्तों उस समय बाथरूम का दरवाजा अंदर से बंद नहीं था और जैसे ही मैंने दरवाजा खोला तो देखा कि रूपा अपने बाथरूम के कोमोड पर बैठी हुई थी। उस समय उसका गाऊन, ब्रा और पेंटी सब कुछ खुली हुई उसके पास ही में रखी हुई थी। वो उस समय एकदम नंगी थी और उसने अपने एक हाथ की तीन उँगलियाँ अपनी चूत में डाली हुई थी और वो अपने दूसरे हाथ से अपने बूब्स को दबा रही थी। उस समय उसकी दोनों आँखे बंद थी और वो बहुत मस्त मज़ा ले रही थी।

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फिर में करीब पांच मिनट तक बिना कुछ कहे बिना हिले खड़ा रहकर उसको अपनी चकित नजरों से देखता रहा, जिसकी वजह से मेरा लंड पूरा तनकर खड़ा और एकदम सख्त हो चुका था। अब मेरा मन कर रहा था कि में अभी उसको पकड़कर उसकी बहुत जमकर चुदाई कर दूँ, लेकिन मैंने अपने आपको शांत कर रखा था और कुछ देर बाद मैंने कहा रूपा यह क्या है? तब रूपा मेरी आवाज को सुनकर एकदम से डर गई और वो अपनी उंगली को चूत से बाहर खींचकर अपने उस एक तरफ पड़े गाउन से अपने नंगे गोरे जिस्म को ढकने की कोशिश करने लगी। अब वो मेरी तरफ देखती हुई अपने कमरे में चली गई और में हॉल में जाकर सोफे पर बैठ गया, कुछ देर बाद वो कपड़े पहनकर अपने कमरे से बाहर आई और वो मेरे पास आकर बैठ गई। अब वो मुझसे कहने लगी कि तुम्हे क्या पता एक शादीशुदा औरत इतने दिन अपने पति के बिना कैसे रह सकती है? सेक्स की जरूरत तो हर एक को होती है उस काम को करने की सभी की इच्छा होती है और मेरी भी बहुत होती है। फिर मुझसे यह सभी बातें कहकर वो उसी समय मुझसे लिपटकर ज़ोर ज़ोर से रोने लगी थी। अब मैंने उसको संभाला और उसने कुछ देर बाद शांत होकर मुझे यह बात बाहर किसी से नहीं कहने को कहा उसके पति से भी नहीं, में उसकी वो बात मान गया।

फिर मैंने उसको कहा कि अगर तुम्हे सेक्स की इतनी ही चाहत है तो में तुम्हारी यह चाहत जरुर पूरी कर सकता हूँ, यह शब्द मेरे मुहं से सुनकर वो और भी ज़ोर से मुझसे लिपट गई और कुछ देर बाद मुझे उसने एक बार फिर से एक चुम्मि दी। अब उसने मुझसे पूछा क्या सच क्या तुम मुझे प्यार करोगे? और यह बातें मेरे पति को भी नहीं बताओगे? तुम कितने अच्छे हो यह बात कहकर वो मुझे चूमने लगी और में भी उसको कसकर अपनी बाहों में दबाने लगा और कुछ देर तक हम वैसे ही रहे। फिर में जाने के लिए उठने लगा, तभी उसने मुझसे कहा कि तुम कहाँ जा रहे और तुम मुझे कब प्यार करोगे? मैंने उसको कहा कि में शाम को आठ बजे आ जाऊंगा और फिर में अपने घर चला गया। फिर उसके बाद में शाम को उसके घर जा पहुँचा और अंदर गया तो मैंने देखा कि उसने एक बहुत ही सुंदर जालीदार साड़ी पहन रखी थी। दोस्तों उसके बड़े आकार के बूब्स उसके ब्लाउज से बाहर आने को तड़प रहे थे, उसका वो गोरा मुलायम पेट पूरा साफ साफ नजर दे रहा था और वो एक शादीशुदा थी, इसलिए उसका जिस्म पूरा हराभरा था और मुझे ऐसी ही औरते अच्छी लगती थी।

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दोस्तों उसकी कमर बड़ी मस्त थी, वो ज्यादा गोरी नहीं थी, लेकिन उसका रंग बहुत ही मस्त था, वो बहुत ही सुंदर और हॉट सेक्सी औरत थी और वो सर से लेकर पैरों तक एकदम सेक्सी और चोदने के लायक ही थी। दोस्तों उसको देखकर मुझे ऐसा लगता था कि जैसे वो मुझसे अपनी चुदाई करवाने के लिए एकदम तैयार है। अब वो तुरंत मुझे अपने कमरे में ले गई और फिर उसने अंदर से अपना बेडरूम का दरवाजा बंद कर लिया, उसके लंबे काले बाल खुले हुए थे। अब मैंने उसको कहा कि आज में उसको हर तरह से खुश और उसकी सेक्स की गर्मी को पूरी तरह से ठंडा कर दूँगा। वो मुस्कुराकर मुझसे बोली कि चलो देखते है। फिर उसके ऐसा कहने पर मेरा लंड और भी ज्यादा गरम हो गया और मैंने उसको अपनी बाहों में भर लिया, में उसके नरम गुलाबी होंठो को चूमने लगा, कुछ देर बाद मैंने उसको पलंग पर बैठा दिया और अब में उसके नरम मुलायम पेट पर अपना हाथ फेरने लगा। फिर वो भी अब जोश में आने लगी और वो मेरे सर के बाल को सहलाने लगी। मैंने उसके बूब्स को अपने एक हाथ से ज़ोर से पकड़ लिया और में उनको दबाने मसलने लगा था, वो पहले तो थोड़ा दर्द से करहा रही थी, लेकिन उसके बाद वो धीरे धीरे एकदम शांत हो गई और में उसके बूब्स को लगातार दबाता रहा और ऐसा करते हुए मैंने उसकी साड़ी के पल्लू को उसके कंधे के ऊपर से नीचे गिरा दिया।

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फिर धीरे धीरे में अब उसकी साड़ी को खोलने लगा और वो अब मेरे सामने अपने पेटीकोट और ब्लाउज में थी। उसके बाद उसने भी अब मेरी शर्ट और पेंट को उतार दिया, जिसकी वजह से में अब सिर्फ़ अंडरवियर में था। अब उसने मुझे पलंग पर लेटा दिया और वो मेरे ऊपर सो गयी और अपने होंठो से मेरी छाती को चूमने और फिर जीभ से चाटने भी लगी। फिर उसके ऐसा करने पर मुझे लगा कि यह अब पूरी तरह से गरम हो चुकी है और इसको इस काम का पूरी तरह से बहुत ज्यादा अनुभव भी है और मुझे उसकी चूत की गरमी का भी अंदाजा हो गया। फिर वो मुझे कुछ देर तक ऐसे ही लगातार चूमती रही और कुछ देर बाद उसने मुझसे कहा कि क्या तुम भी अब मेरे बूब्स का मज़ा नहीं लेना चाहते और मुझसे यह शब्द कहते कहते उसने अपना ब्लाउज उतार दिया। अब उसके दोनों बड़े आकार के बूब्स को देखकर में एकदम हैरान बहुत चकित हो गया, क्योंकि उसकी निप्पल का रंग भूरा था और उसके बूब्स का रंग बिल्कुल गोरा था। फिर मैंने जोश में आकर उसको एक ही बार में पलंग पर लेटा दिया और अब में उसके ऊपर चड़कर उसकी एक निप्पल को चूसने लगा और दूसरे बूब्स को दबाने लगा था, जिसकी वजह से वो ज़ोर ज़ोर से आहें भरने लगी और मुझसे और भी ज़ोर से दबाने को कहा।

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