Tuesday, May 5, 2020

Nai bhabhi ki chudai ki sex story part 2

Y bhabhi daver ki sex story h jisma devar apni gav wali bhabhi ki chudai ker te h.

Nai bhabhi ki chudai ki sex story part 2
Nai bhabhi ki chudai ki sex story part 2 


मेरी भाभी की सेक्स कहानी के पहले भाग

Nai bhabhi ki chudai ki sex story part 2 

में आपने पढ़ा कि भाई भाभी की सेक्सी सिसकारियाँ सुनकर मैं भाभी की चूत चुदाई करने के सपने देखने लगा.
अब आगे:

Devar bhabhi ki chudai ki khani


उस रात जब भाभी पढ़ाने आई तो उसने एक पारदर्शी नाइटी पहन रखी थी. जब भाभी कुछ उठाने के लिए नीचे झुकी तो मुझे भाभी की वही गुलाबी कच्छी दिखाई दे गई जिसको मैंने छत पर सूंघा था. यह नजारा देख कर मेरे लंड ने हरकत करनी शुरू कर दी थी। जब मुझसे रहा नहीं गया तो मैं बोल ही पड़ा- भाभी आपने तो बताया नहीं कि वो कच्छी किसकी थी लेकिन मुझे पता चल गया कि वो छोटी सी कच्छी किसकी थी।
“तुझे कैसे पता चल गया कि वो किसकी थी?” भाभी ने शरमाते हुए पूछा।
“क्योंकि वही कच्छी आपने इस वक्त नाइटी के नीचे पहन रखी है।”
“हट बदमाश! तू ये सब देखता रहता है?”

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“भाभी एक बात पूछूं अगर आप बुरा न मानो तो, आप इतनी छोटी सी कच्छी में फिट कैसे हो जाती हो?” मैंने हिम्मत जुटा कर पूछ ही लिया.
“क्यों, मैं क्या तुझे मोटी लगती हूँ?”
“नहीं भाभी, आप तो बहुत ही सुन्दर हैं, लेकिन आपका बदन इतना सुडौल और गठा हुआ है। आपके नितम्ब इतने भारी और फैले हुए हैं कि इस छोटी सी कच्छी में समा ही नहीं सकते। आप इसे पहनती ही क्यों हो? यह तो आपकी जायदाद को छुपा ही नहीं सकती है और फिर ये तो बिल्कुल पारदर्शी है, इसमें तो आपका सब कुछ दिखाई देता है।”

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“लगता है कि तेरी शादी जल्दी ही करवानी पड़ेगी, तू कुछ ज्यादा ही समझदार हो गया है।” भाभी ने कहा.
“जिसकी इतनी सुन्दर भाभी हो वो भला किसी और लड़की की तरफ कैसे देख सकता है!”
“ओह हो! अब तुझे कैसे समझाऊं? देख रामू जिन बातों के बारे में तुझे अपनी बीवी से पता लग सकता है और जो चीज तुझे तेरी बीवी ही दे सकती है वो मैं नहीं दे सकती, इसलिए कह रही हूं कि तू शादी कर ले।”

“भाभी ऐेसी भी क्या चीज है जो सिर्फ मेरी बीवी मुझे दे सकती है और आप नहीं दे सकती?” मैंने अनजान बनते हुए पूछा. मेरा लंड इस वक्त फनफना रहा था।
“मैं सब समझती हूँ, चालाक बनने की कोशिश मत कर. मुझे ऐसा लग रहा है कि तुझे पढ़ना-लिखना नहीं है। इसलिए मैं अब सोने जा रही हूँ।”
“लेकिन भैया ने तो आपको नहीं बुलाया?” मैंने शरारत भरे स्वर में पूछा।

वो मुस्कराते हुए अपने कमरे की तरफ चल दी। उनकी मस्तानी चाल, मटकते हुए नितम्ब और दोनों चूतड़ों के बीच में पिस रही बेचारी कच्छी को देख कर मेरा बुरा हाल हो गया था।

अगले दिन भैया जब ऑफिस चले गये थे तो भाभी और मैं बरामदे में बैठ कर चाय पी रहे थे. सामने से सड़क पर एक गाय गुजर रही थी. उसके पीछे ही एक भारी-भरकम सांड हुंकार भरता हुआ आ रहा था. सांड का लम्बा, मोटा लंड नीचे झूल रहा था.
सांड के लंड को देख कर भाभी के माथे पर पसीना आ गया. भाभी की नज़र सांड के लंड से हट ही नहीं रही थी. फिर सांड एकदम से गाय के ऊपर चढ़ गया. उसने गाय की योनि में पूरा लंड उतार दिया.

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यह देख कर भाभी के मुंह से हल्की सी सिसकारी निकल गई. मैं भी भाभी को ही देख रहा था. फिर भाभी ने देखा कि मैं भी उनको देख रहा हूँ तो वो फिर शरमा कर वहां से उठ गई और भाग कर अंदर चली गई. मैं भी भाभी के पीछे ही अन्दर चला आया. भाभी उस वक्त किचन में थी.

मैंने पूछा- भाभी ये सांड क्या कर रहा था?
भाभी बोली- तुझे नहीं पता?
मैंने अनजान बनते हुए कहा- नहीं तो।
भाभी बोली- ये वही कर रहा था जो एक मर्द अपनी बीवी के साथ करता है.
मैंने पूछा- तो क्या मर्द भी अपनी बीवी पर ऐसे ही चढ़ता है?
भाभी बोली- चुप कर … बदमाश!

मैंने कहा- ओह, अब मैं समझा कि रात को भैया आपको क्यों बुलाते हैं.
भाभी बोली- चुप कर नालायक, ऐसा तो सभी शादीशुदा लोग करते हैं.
मैंने कहा- तो जिनकी शादी नहीं हुई है वो ऐसा नहीं कर सकते हैं क्या?
भाभी बोली- कर तो सकते हैं लेकिन …
मैं बीच में ही बोल पड़ा- तो फिर भाभी, मैं भी आप पर चढ़ सकता हूं न!
भाभी ने मेरे मुंह पर हाथ रख दिया और बोली- चुप कर, मुझे अपना काम करने दे। बहुत बेशर्म हो गया है तू। यह कह कर उन्होंने मुझे किचन से बाहर धकेल दिया.

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इस घटना को हुए दो दिन बीत गये. फिर मैं छत पर पढ़ाई करने के लिए जा रहा था. मैंने भाभी के कमरे में झांक कर देखा तो भाभी कोई किताब पढ़ रही थी. उनकी नाइटी उनके घुटनों तक ऊपर चढ़ी हुई थी. नाइटी इस प्रकार से उठी हुई थी कि भाभी की गोरी टांगें, मोटी, मांसल जांघें और जांघों के बीच में सफेद रंग की कच्छी साफ नजर आ रही थी.

यह नजारा देख कर मेरे कदम एकदम से रुक गये. इस नजारे को देखने के लिए मैं छुप कर खिड़की से झांकने लगा. यह कच्छी भी उतनी ही छोटी थी और बड़ी मुश्किल से भाभी की चूत को ढक पा रही थी. भाभी की घनी काली झाटें दोनों तरफ से कच्छी के बाहर निकल रही थी.

वो बेचारी छोटी सी कच्छी भाभी की फूली हुई चूत के उभार से बस किसी तरह चिपकी हुई थी. चूत की दोनों फांकों के बीच में दबी हुई कच्छी ऐसे लग रही थी जैसे हंसते वक्त भाभी के गालों में डिम्पल पड़ जाते हैं.

उन्होंने झट से नाइटी को नीचे करते हुए कहा- क्या देख रहा है रामू?
मेरी चोरी पकड़ी जाने के कारण मैं सकपका गया.
“कुछ नहीं भाभी!” यह कहते हुए मैं ऊपर भाग गया.

उस दिन के बाद से तो मुझे रात दिन भाभी की सफेद कच्छी में छिपी हुई चूत की याद सताने लगी.

अब मेरे दिल में विचार आया कि क्यों न मैं भाभी को अपने विशाल लंड के दर्शन करवा दूँ. भाभी रोज सवेरे मुझे दूध का गिलास देने मेरे कमरे में आती थी. एक दिन सवेरे मैं अपनी लुंगी को घुटनों तक उठा कर न्यूज़पेपर पढ़ने का नाटक करते हुए इस प्रकार बैठ गया कि सामने से आ रही भाभी को मेरी लुंगी के नीचे लटकता हुआ मेरा लंड दिख जाये.

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जब मुझे भाभी के आने की आहट सुनाई दी तो मैंने न्यूज़पेपर को चेहरे के सामने कर लिया और पढ़ने का नाटक करने लगा लेकिन मैं पीछे से सब कुछ देख सकता था. मैंने पहले ही उसमें एक छोटा सा छेद कर लिया था.

भाभी जब कमरे में दाखिल हुई तो उनकी नजर मेरी लुंगी के नीचे लटक रहे मेरे लंड पर गई, मेरे बड़े से लंड को देख कर भाभी एकदम से वहीं रुक गई. वो सकपका गई और फिर मेरे लंड को ध्यान से देखने लगी. मैंने देखा कि भाभी की आंखें आश्यचर्य के कारण फैल कर बड़ी हो गई थीं.

फिर भाभी ने मेरे पास बेड के ऊपर दूध का गिलास रख दिया और चली गई. मगर पांच मिनट के बाद ही भाभी के आने की आहट फिर से सुनाई दी.
मैं सोच रहा था कि अब क्या करने आ रही है भाभी? मैंने फिर से न्यूज़पेपर को चेहरे के सामने कर लिया और टांगों को फैला कर चौड़ी कर लिया.

भाभी के हाथ में पौंछा था. वो सामने ही बैठ कर नीचे फर्श पर कुछ साफ करने का नाटक करने लगी. उनकी नजर मेरे लंड पर लगी हुई थी. इसलिए मेरे लंड ने हरकत करनी शुरू कर दी.
मैंने न्यूजपेपर हटा कर पूछा- क्या बात है भाभी, आप वहां फर्श पर क्या कर रही हो?
भाभी घबरा कर बोली- कुछ नहीं. थोड़ा सा दूध यहां पर गिर गया था. उसे ही साफ कर रही हूँ.

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मैं यह सुन कर मुस्करा रहा था क्योंकि जिस तरह अब तक मुझे भाभी की चूत के सपने आते थे अब भाभी को मेरे लंड के सपने आयेंगे.
मगर भाभी अभी मुझसे एक कदम आगे थी. उन्होंने तो मेरे लंड के दर्शन कर लिये थे लेकिन मैंने उनकी चूत अभी तक नहीं देखी थी. इसलिए मैंने उनकी चूत को देखने का प्लान बनाया.

मैं जानता था कि भाभी रोज घर का काम निपटाने के बाद नहाने के लिए जाती है.
उस दिन मैं जान-बूझ कर अपने कमरे को खुला छोड़ कर कॉलेज गया था. फिर मैं कॉलेज से जल्दी ही वापस आ गया. मैंने आकर देखा कि दरवाजा अंदर से बंद था. मैं खिड़की के रास्ते से अपने कमरे में घुस गया. फिर बहुत देर इंतजार करने के बाद मेरी तपस्या रंग लाई. मैंने देखा कि भाभी गुनगुनाते हुए बाथरूम की तरफ चली आ रही है. बाथरूम में घुस कर उन्होंने नाइटी उतारी दी. आसमानी रंग की ब्रा और पैंटी में भाभी कमाल लग रही थी. गोरा बदन और उस पर बड़े-बड़े चूचे और चूतड़. ब्रा तो जैसे भाभी के चूचों को संभाल ही नहीं पा रही थी.

वही छोटी सी कच्छी जिसमें भाभी के मोटे चूतड़ झूल रहे थे. बेचारी कच्छी भाभी की गांड में घुसने को हो रही थी. फिर भाभी ने पीठ मेरी तरफ कर ली और आइने के सामने खड़ी होकर ब्रा और कच्छी को उतार कर एक तरफ फेंक दिया. भाभी के नंगे मोटे चूतड़ देख कर मेरा लंड बेहाल होने लगा था.

मैं सोच रहा था कि जरूर भैया मेरी भाभी की चूत को पीछे से भी लेते होंगे. हो सकता है कि भैया ने शायद भाभी की गांड भी मारी हो। मुझे ऐसी औरत की गांड मिल जाये तो मैं स्वर्ग जाने से भी मना कर दूँ.

लेकिन मेरी योजना पर उस वक्त पानी फिर गया जब भाभी बिना मेरी तरफ घूमे ही एक तरफ होकर अंदर नहाने लगी. उनकी ब्रा और कच्छी वहीं फर्श पर पड़ी हुई थी बाहर।

मैंने चुपके से जाकर भाभी की कच्छी को उठा लिया और उसको सूंघने लगा. भाभी की चूत की मनमोहक खुशबू इतनी मादक थी कि मैं वहीं पर झड़ गया. मैंने भाभी की कच्छी को अपने पास ही रख लिया. फिर सोचा कि भाभी की चूत देखने की तमन्ना तब पूरी हो जायेगी जब भाभी बाहर निकलेगी.

लेकिन मेरी किस्मत ने फिर भी मेरा साथ नहीं दिया. मैंने छुप कर देखा तो भाभी ने एक काले रंग की ब्रा और कच्छी पहनी हुई थी. फिर भाभी की नजर नीचे पड़ी हुई ब्रा पर गई लेकिन वहां पर कच्छी नहीं थी. मैं वहां से भाग गया क्योंकि शायद भाभी को शक हो गया था कि मेरे अलावा ये काम कोई नहीं कर सकता है.

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भाभी नाइटी पहन कर मेरे कमरे में आई. मैं बेड पर ऐसे लेटने का नाटक कर रहा था जैसे कि मैं गहरी नींद में हूं.
भाभी मुझे हिलाते हुए बोली- रामू, तू अंदर कैसे आया?
मैंने आंखें मलने का नाटक करते हुए कहा- क्या करूं भाभी, आज कॉलेज जल्दी बंद हो गया था. घर का दरवाजा बंद था. बहुत खटखटाने पर जब दरवाजा नहीं खुला तो मैं अपनी खिड़की के रास्ते से अंदर आ गया.

भाभी बोली- तू कितनी देर से अंदर है?
मैंने कहा- यही कोई एक घंटे से।

अब तो भाभी को शक हो गया कि कहीं शायद मैंने उनको नंगी तो नहीं देख लिया हो. उनकी कच्छी भी गायब थी.
भाभी ने पूछा- तूने मेरे कमरे से मेरी कोई चीज़ तो नहीं उठाई?
मैंने कहा- अरे हां भाभी, जब मैं आया तो मैंने देखा था कि कुछ कपड़े जमीन पर पड़े हुए थे. मैंने उनको उठा कर रख लिया था.

ये सुन कर भाभी का चेहरा सुर्ख लाल हो गया.
वो बोली- वापस कर मेरे कपड़े।

मैंने तकिये के नीचे से भाभी की कच्छी निकालते हुए कहा- भाभी, ये तो अब मैं वापस नहीं दूंगा।
भाभी बोली- क्यों, अब तू औरतों की कच्छी पहनेगा क्या?
“नहीं भाभी” मैंने कच्छी को सूंघते हुए कहा. इसकी मादक खुशबू ने तो मुझे दीवाना बना दिया है।

वो बोली- अरे पगला है क्या? ये तो मैंने कल से पहनी हुई थी. धोने तो दे इसको!
मैंने कहा- नहीं भाभी, धोने से तो इसमें से आपकी महक निकल जायेगी. मैं इसको ऐसे ही रखना चाहता हूँ.
“धत् पागल … अच्छा ये बता कि तू घर में कितनी देर से है?”
भाभी शायद जानना चाहती थी कि कहीं मैंने उसे नंगी तो नहीं देख लिया है.

मैंने भाभी की मंशा जान कर कहा- भाभी, मुझे पता है कि आप ऐसा क्यों पूछ रही हो। लेकिन इसमें मेरी गलती बिल्कुल भी नहीं है. जब मैं आया तो आप शीशे के सामने नंगी खड़ी हुई थी. आपका नंगा बदन बहुत ही सुन्दर लग रहा था. पतली कमर, भारी नितम्ब और गरदाई हुई जांघें देख कर तो बड़े से बड़े ब्रह्मचारी की नीयत भी डगमगा जाये.

मेरी बात सुन कर भाभी शर्म से लाल हो उठी। वो बोली- तुझे शर्म नहीं आती। मुझे तो ऐसा लगता है कि शायद तेरी नीयत भी खराब हो गई है.
मैंने कहा- आपको नंगी देख कर किसकी नीयत खराब नहीं होगी भाभी?
वो बोली- हे भगवान, आज तेरे भैया से तेरी शादी की बात करनी ही पड़ेगी। इससे पहले मैं कुछ और कहता वो अपने कमरे में भाग गई।

भाभी से इस तरह की सेक्सी बातें करने और उनकी कच्छी को उनके सामने ही सूंघने के बाद मेरे अंदर की प्यास बहुत ज्यादा बढ़ गई और मेरा लंड तन गया. फिर मुझसे रहा न गया और मैं भाभी के पीछे ही उनके रूम में चला गया.
वो अलमारी में कपड़े ठीक कर रही थी. मैंने अचानक से जाकर भाभी को पीछे से पकड़ लिया.
भाभी बोली- क्या कर रहा है रामू? छोड़ दे मुझे।

लेकिन मैंने अपना खड़ा हुआ लंड भाभी के मोटे चूतड़ों पर सटा दिया. भाभी की गांड पर लंड को सटा कर मैं उनकी गांड पर लंड को ऊपर नीचे रगड़ने लगा. भाभी के भीगे बालों की खुशबू मेरी हवस को और ज्यादा बढ़ा रही थी.

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फिर मैंने भाभी की गर्दन को चूमना शुरू कर दिया. भाभी की नाइटी बहुत ही सेक्सी थी और मखमली थी. जिसके कारण मेरा बदन उनके बदन की गर्माहट को महसूस कर सकता था.

दो-तीन मिनट तक भाभी मुझे हटाने का नाटक करती रही लेकिन जब मेरा लंड बार-बार भाभी की गांड से रगड़ता रहा तो भाभी गर्म हो गई. मैंने भाभी के चूचों को नाइटी के ऊपर से ही दबा दिया. भाभी के मुंह से सिसकारी निकल गई.

अगले दो मिनट में मैंने भाभी को बेड पर ले जाकर पूरी नंगी कर दिया था लेकिन अभी पैंटी को नहीं हटाया था. मैं आराम से भाभी की चूत को देखना चाहता था. फिर मैंने भाभी की काली कच्छी को धीरे से खींच दिया तो भाभी के घने झाटों वाली चूत नंगी हो गई जो गीली सी लग रही थी.

मैं भाभी के ऊपर टूट पड़ा और अपने लंड को बाहर निकाल कर भाभी के चूचों को पीते हुए उसकी चूत पर अपने लंड को रगड़ने लगा.

भाभी कामुक हो उठी और उसने मेरे होंठों को चूस लिया. फिर मैंने भाभी की चूत पर लंड को सेट किया और उसकी चूत में अपना मूसल लंड घुसा दिया तो भाभी चीख पड़ी- आह्ह रामू … फाड़ दी तूने मेरी चूत, आह्ह्ह। बाहर निकाल अपने सांड जैसे लंड को।
लेकिन मैंने भाभी की चूत से लंड नहीं निकाला और पूरा लंड भाभी की चूत में उतार कर उसकी चुदाई करने लगा. कुछ देर कराहने के बाद भाभी को भी मजा आने लगा.

मैंने भाभी की चूत को तेजी के साथ चोदना शुरू कर दिया. भाभी मेरी चुदाई से गर्म होकर पांच मिनट में ही झड़ गई. उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया. फिर मैंने भी दो-तीन धक्के लगाये और भाभी की चूत के झाटों के ऊपर अपना माल गिरा दिया.

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हम दोनों हांफने लगे। फिर हम दोनों ऐसे ही नंगे लेटे रहे। मैंने भाभी की चूत को चाट लिया. जिस पर मेरा माल भी लगा हुआ था. उस दिन मैंने भाभी को दो बार और चोदा.

फिर रात को मैंने दरवाजे से कान लगा कर सुना तो भाभी भैया से कह रही थी- आज बहुत दर्द हो रहा है. आपने कल जोर से चोद दी।
उस दिन भाभी ने अपनी चूत नहीं चुदवाई।

मगर दिन में अब भाभी मेरे मोटे और लम्बे लंड से ही चूत को चुदवाने लगी. उसको मेरा लंड लेने में ज्यादा मजा आने लगा. जब तक मैं वहां पर रहा मैंने भाभी की चूत को चोद-चोद कर चौड़ी कर दिया.

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